By ~Chander Pandey अपनी नज़्मों की तरह खुलते ही गए गुलजार

अपने गीतों से हर वर्ग के दिलों पर राज करने वाले मशहूर गीतकार गुलजार का। शब्दों के जादूगर गुलजार का कहना है कि फिल्में समाज केआईने की तरह हैं। जो समाज में चल रहा होता है, उसे फिल्मों में ज्यादा प्रभावी तरीके से दिखाया जाता है।
‘जंगल-जंगल पता चला है, चड्ढी पहनकर फूल खिला है’ से लेकर ‘दिल तो बच्चा है जी’ और ’बीड़ी जलई ले जिगर से पिया’ गाने इस शख्सियत की पहचान हैं। समय की मांग पर गुलजार ने खुद को बदला है। वे कहानी के जादूगर मुंशी प्रेमचंद के दीवाने हैं। इसीलिए वह शुक्रवार को दिल्ली स्थित दूरदर्शन भवन पहुंचे।
मौका था उनके द्वारा मुंशी प्रेमचंद की कहानी गोदान और निर्मला पर निर्देशित नाटकों की री लांचिंग का। दोनों नाटक पहली बार 2004 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए थे। गुलजार को शनिवार को विज्ञान भवन में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जाएगा। प्रेमचंद की कहानी पर निर्देशित नाटकों की री लांचिग के मौके पर गुलजार ने मीडिया के सवालों का हल्के फुल्के अंदाज में जवाब दिया।

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